LIC धन वर्षा योजना: 1 बार भरें प्रीमियम भरो और पाओ 10 गुना मुनाफा, देखें कैसे

LIC Dhan Varsha Yojana: देशभर में निजी और सहकारी संस्थाओं द्वारा लोगों के कल्याण के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई जाती है, जिसके माध्यम से लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उन्हें वित्तीय या अन्य सहायता प्रदान की जाती है। इसी के चलते वर्तमान में LIC द्वारा लोगों के लिए LIC धन वर्षा योजना की शुरुआत की गई है। LIC धन वर्षा योजना आपके पैसों की सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से शुरू की गई है। आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से इस योजना की पूरी जानकारी प्रदान करेंगे। अगर आप भी लाभ उठाना चाहते हैं तो पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

LIC धन वर्षा योजना: 1 बार भरें प्रीमियम भरो और पाओ 10 गुना मुनाफा, देखें कैसे

LIC धन वर्षा योजना: LIC द्वारा लोगों को फायदा देने और लोगों के पैसों की सुरक्षा के लिए ही धन वर्षा स्कीम (LIC Dhan Varsha Scheme) शुरुआत की गई है। इसमें शर्त यह रहेगी कि आपको बस एक बार प्रीमियम भरना होगा और इसके बाद आपको 10 गुना रिटर्न प्राप्त हो जाएगा। आज के समय में हर कोई अपने भविष्य के लिए बचत के साथ ही वित्तीय सुरक्षा चाहता है। ऐसे में भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC लोगों की जरूरतों के हिसाब से बीमा पॉलिसी लेकर आती रहती है। एलआईसी आपके पैसों की सुरक्षा के लिए खास स्कीम लेकर आई है। जिसका नाम धन वर्षा स्कीम (LIC Dhan Varsha Scheme) है. इस पॉलिसी की खास बात ये है कि इसमें आपको केवल एक बार प्रीमियम देना होता है।

LIC Dhan varsha Yojana: इस स्कीम में आप एक बार प्रीमियम जमा करके 10 गुना तक का रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।धन वर्षा प्लान एक नॉन- पार्टिसिपेटिंग (Non – Participating), पर्सनल (Personal), सिंगल प्रीमियम (Single Premium) और एक सेविंग बीमा स्कीम (Saving Scheme) है। धन वर्षा प्लान में आपको दो तरह के ऑप्शन मिलते हैं पहला ऑप्शन में आपको जमा प्रीमियम पर 1.25 गुना तक का रिटर्न मिलेगा। अगर आप 10 लाख रुपये का सिंगल प्रीमियम देते हैं और पॉलिसी होल्डर की मृत्यु हो जाती है तो 12.5 लाख रुपये का गारंटीड बोनस का लाभ भी मिलेगा। दूसरे ऑप्शन में आपको 10 गुना तक का रिटर्न मिल सकता है। इसमें 10 साल रुपये का निवेश करने पर आपको 1 करोड़ रुपये तक का रिटर्न मिल सकता है।

LIC धन वर्षा योजना: एलआईसी की धन वर्षा पॉलिसी को आप 10 या 15 साल तक के लिए खरीद सकते हैं। ऐसे में 10 साल की पॉलिसी खरीदने की कम से कम उम्र 3 साल और 15 साल की खरीदने के लिए कम से कम 8 साल की उम्र होना जरूरी है।धन वर्षा पॉलिसी में निवेश करके 1.25 गुना रिटर्न प्राप्त करने की अधिकतम उम्र 60 साल और 10 गुना तक का रिटर्न प्राप्त करने के लिए अधिकतम उम्र 40 साल है। इस पॉलिसी पर कम ब्याज दर पर आप लोन की सुविधा का लाभ भी ले सकते हैं।

छोटे व्यवसाय से बड़ा मुनाफा

देश में मुर्गी पालन का व्यवसाय आधुनिक होने के साथ-साथ अपना रंगरूप भी बदल रहा है। यदि मुर्गीपालन को सरकारी स्तर पर बढ़ावा दिया जाए और सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाए तो निश्चित है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दूर होने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। सुरक्षा का आशय किसी कमांडों से नहीं है, बल्कि ऐसी सामाजिक सुरक्षा की जरूरत होती है जो मुहैया कराना बेहद जरूरी है। छोटा और गरीब परिवार मुर्गीपालन करता है तो उसके सामने कई तरह की चुनौतियां होती है। सबसे पहले तो गांव के दबंगों का प्रयास होता है कि उसे बिना पैसे की मुर्गी उपलब्ध हो जाए। पैसे न देने में अपनी शान समझी जाती है वहीं दूसरी तरफ जब कोई अफसर या नेता गांव पहुंचता है तो चमचों की फौज इकट्ठी हो जाती है और उनका पूरा प्रयास होता है कि बिना पैसे के एक मुर्गा लाकर साहब को खिलाकर अपना उल्लूू सीधा किया जाए। इस तरह का जो मुफ्त में खाने वालों का समुदाय है उससे इस व्यवसाय को बचाने के लिए पुख्ता उपाय किए जाने की बेहद जरूरत है। हालांकि यह भी सच है कि कुछ अतिरिक्त आमदनी के लिए घरों में छोटे पैमाने पर चलाए जाने वाले उद्योग से पूरी तरह तकनीक पर आधारित और तेजी से बढऩे वाले उद्योग में परिणत हो गया है। यह कायापलट कई पैमानों पर बेहद खास है। इसका एक खास पहलू यही है कि कई दूसरे विकासशील देशों की तुलना में यह क्षेत्र तकनीक निर्माण के साथ-साथ जरूरी उपकरणों और आगतों के निर्माण के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। लेकिन यह बताना बेहद जरूरी और लाजिमी है कि जिस गांव गरीब हरिजन रहते हंै और उनकी तादात भी बहुत कम होती है वहां दबंगता के आगे इन गरीबों को न केवल झुकना पड़ता है बल्कि दबंगों के लिए अपने छोटे से व्यावसाय के मुनाफे का हिस्सा मुर्गे के तौर पर देना पड़ता है। साथ ही मुर्गियों के प्रजनन, उनकी बीमारियों की पहचान, टीकों के विकास और प्रसंस्कृत पोल्ट्री उत्पादों के लिहाज से इसने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा भी विकसित कर लिया है। इसमें अहम बात यही है कि इस प्रगति में सरकारी और निजी क्षेत्रों के समन्वित प्रयासों का योगदान रहा है। दुग्ध उद्योग में जहां अधिकांश वृद्घि चार-पांच गाय-भैंस रखने वाले छोटे उत्पादकों के असंगठित क्षेत्र के दम पर हुई है, उसके उलट पोल्ट्री क्षेत्र में आई क्रांति के पीछे संगठित क्षेत्र का पोल्ट्री कारोबार है। देश के कुल पोल्ट्री उत्पाद का 70 फीसदी से ज्यादा संगठित क्षेत्र से आता है और इसकी अधिकांश बिक्री शहरों में होती है। पोल्ट्री उद्योग का शहरों की ओर झुकाव शहरी और ग्रामीण इलाकों में अंडों और मांस की उपलब्धता का ही अनुचित नतीजा है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार शहरों में जहां प्रति व्यक्ति 170 अंडों की उपलब्धता है तो वहीं ग्रामीण इलाकों में यही आंकड़ा बमुश्किल 20 है। पोल्ट्री मांस के उपभोग का भी कमोबेश यही रुझान है। देश के पोल्ट्री क्षेत्र का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि उत्पादन के मोर्चे पर तेजी आने के बावजूद उपभोक्ताओं की पसंद व्यापक तौर पर जस की तस बनी हुई है। अधिकांश खरीदार मुर्गियां खरीदना ही पसंद करते और उन्हें अपने सामने ही हलाल कराते हैं। इसके अलावा संगठित क्षेत्रों में पाली जाने वाली सफेद मुर्गियों के मांस पर देहाती इलाकों में पाले जाने वाले रगें-बिरंगे पंखों वाले ब्रॉयलर चिकन को ही तरजीह दी जाती है। यही बात भूरे रंग के अंडों पर लागू होती है, जिनके लिए ग्राहक अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार रहते हैं। ऐसे में ग्राहकों की पसंद का ख्याल रखना पोल्ट्री उद्योग का खास मकसद है। वे ऐसी प्रजातियों के विकास पर काम कर रहे हैं, जो देसी बहुरंगी मुर्गियों की तरह नजर आ सकें और उनसे भूरे रंग के अंडे प्राप्त हो सकें। दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के पोल्ट्री ब्रीडर्स का घरों में चलने वाली पोल्ट्री फार्मिंग को लोकप्रिय बनाने का एक और अतिरिक्त मकसद है, जिन्हें ऐसी उच्च क्षमताओं वाली प्रजातियों के विकास के जरिये हासिल किया जा सकता है, जो घरों के अलावा फैक्टरी फार्मों में भी आसानी से अनुकूलित हो सकें। कृषि के लिए वाणिज्यिक ओर वाणिज्यिक योग्य तकनीकों के लिए शुरू आईसीएआर के नए प्रकाशन की शृंखला में इन नई प्रजातियों का उल्लेख किया गया है। प्राणी विज्ञान क्षेत्र की सूची में 20 ऐसी प्रजातियों का जिक्र है, जिन्हें या तो पोल्ट्री किसानों को दे दिया गया है या फिर उन्हें वाणिज्यिक उत्पादन के लिए इच्छुक उद्यमियों को दिया जा रहा है। अपने रंग-बिरंगे पंखों और भूरे अंडों के चलते इन प्रजातियों की बाजार में अच्छी खासी धमक है और उनके विपणन में भी कोई दिक्कत नहीं है। इनमें से कुछ खासतौर से क्रिशब्रो को तो आसानी से देसी मुर्गी के तौर पर ऊंचे दाम पर बेचा जा सकता है। इसका मांस भी देसी मुर्गी के मांस जैसा ही है। इसके ब्रॉयलर का वजन भी छह हफ्तों में 1.5 से 2 किलो का हो जाता है। ऐसी प्रजातियां छोटे और सीमांत किसानों को कुछ अतिरिक्त आमदनी के लिए पोल्ट्री फार्मिंग की ओर आकर्षित कर सकती हैं।

फूड ट्रक व्यवसाय कैसे शुरू करें, कम निवेश में अधिक मुनाफा

फूड ट्रक व्यवसाय कैसे शुरू करें, कम निवेश में अधिक मुनाफा

जानें, व्यवसाय शुरू करने से पूर्व ध्यान रखने वाली खास बातें

आज के महंगाई के युग में ऐसा व्यवसाय चुनना चाहिए जिसमें कम से कम निवेश हो और मुनाफा ज्यादा हो। हम आपको बताते हैं किस व्यवसाय में आपको हो सकता है ज्यादा लाभ और कैसे शुरू करें यह व्यवसाय। आजकल फूड मार्केट खूब फल-फूल रहा है। खाद्य वस्तुओं की जरूरत हर व्यक्ति को होती है और इसमें अनेक वस्तुएं ऐसी हैं जिनकी मांग हर रोज बनी रहती है। कई वस्तुओं की जरूरत तो लोगों को सुबह जल्दी भी रहती है जैसे दूध, फल, सब्जियां इत्यादि। वहीं ऐसी वस्तुओं की आवश्यकता भी कम नहीं होती जो भोजन या नाश्ते के रूप में उपभोग की जाती हैं। इस संदर्भ में यदि आप ट्रक फूड बिजनेस करें तो इसमें काफी कुछ कमा सकते हैं। आपको यह जानकर खुशी होगी कि ट्रक फूड व्यवसाय के लिए बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं होती। आप अपने शहर या गांव की सीमा में ही यह व्यवसाय करना चाहते हैं तो इसमें आपको बड़े ट्रक की आवश्यकता नहीं होगी। इसमें मिनी ट्रक ही यूज कर सकते हैं। फूड व्यवसाय के लिए आपको यह निर्णय लेना होगा कि आप किन खाद्य वस्तुओं से यह व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इसमें वेज और नॉन वेज में से कोई एक चुनें। उदाहरण के तौर पर आपको ऐग सप्लाई करना है या ऐग से निर्मित खाद्य वस्तुओं की सप्लाई करनी है तो इसके लिए उसी के अनुकूल तैयारी भी करनी होगी। इसके अलावा शाकाहारी भोजन के लिए अनेक विकल्प हैं। पहले आप बाजार का भी अध्ययन कर लें ताकि आपको इस व्यवसाय में होने वाली परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। आप अपना व्यवसाय पार्टनर के साथ भी शुरू कर सकते हैं जिससे आर्थिक भार कम होगा। स्वयं के स्तर पर यदि काम करना है तो भी चिंता की कोई बात नहीं है।


सबसे पहले खाद्य सुरक्षा लाइसेंस बनवाएं

खाद्य वस्तुओं की बिक्री एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर करने के लिए आप यदि फूड ट्रक व्यवसाय करना चाह रहे हैं तो सबसे पहले खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण या शॉप एंड इंस्टेब्लिसमेंट से लाइसेंस बनवाना आवश्यक है। इसके बाद आपको जरूरत होगी वाहन लाइसेंस की। इसके लिए आपको आरटीओ विभाग जाना होगा। जिस भी वाहन से आप खाद्य वस्तुओं की सप्लाई करना चाहते हैं उसका लाइसेंस भी जरूरी है अन्यथा आपकों दिक्कत हो सकती है।


वाहन भार अपने मुनाफे को कैसे सुरक्षित करें? क्षमता के अनुकूल हो

फूड ट्रक बिजनेस के लिए आपको खाद्य वस्तुओं की सप्लाई के अनुसार ही वाहन का चयन करना होगा। यह जरूरी नहीं कि नया वाहन हो, पुराने चौपहिया वाहन से भी यह काम आसानी से शुरू कर सकते हैं। इससे निवेश भी कम होगा। इसमें निवेश कम होने का सबसे बड़ा कारण यही है कि आपको नया ट्रक खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वहीं जहां जाकर खाद्य वस्तुओं की बिक्री करनी है वहां ग्राहकों की आवक के हिसाब से ही स्थान का चयन किया जाए तो बेहतर रहता है। उदाहरण के तौर पर किसी सार्वजनिक पार्क के समीप आप अपना फूड ट्रक व्यवसाय कर सकते हैं। ऐसे स्थानों पर पार्क में भ्रमण करने आने वाले लोगों की संख्या सुबह-शाम बहुतायत में बनी रहती है।


खाद्य सामग्री तैयार करने के लिए उपकरण

फूड ट्रक व्यवसाय के लिए आपको व्यवसाय के हिसाब से ही उपकरणों की जरूरत पडग़ी, जैसे फ्रीजर का होना भी आवश्यक है। इससे खाद्य वस्तुएं तरोताजा बनी रह सकती हैं। इसके अलावा वर्क टेबल, वाश बेसिन, सिंक, टीन, कूकर, कढाई एवं फ्रायर आदि ऐसे उपकरण हैं जो प्राय: सभी तरह की डिश में काम आ सकते हैं।

एडवांस आर्डर भी ले सकते हैं

जब आप यह व्यवसाय शुरू कर ही रहे हो तो आप इसके लिए एडवांस आर्डर प्राप्त करने की प्लानिंग भी बना लेें। इससे आपकी खाद्य वस्तुओं की सेल दोगुनी हो जाएगी और आपका मुनाफा भी बढेगा। आजकल ऑनलाइन आर्डर लिए जा सकते हैं। इसके लिए आप अपने खाद्य ट्रक व्यवसाय का व्यापक प्रचार-प्र्रसार भी करवा सकते हैं।

गुणवत्ता और ब्रांड नेम से होगी पहचान

फूड ट्रक व्यवसाय में यदि आप खाद्य वस्तुओं की ज्यादा से ज्यादा बिक्री चाहते हैं तो इसमें संबंधित खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता बेहतर रखनी होगी। इससे आपके व्यवसाय में चार चांद लगेंगे। व्यापार में बढोतरी होगी। आप अपने फूड ट्रक बिजनेस को ब्रांड नेम भी दे सकते हैं। इससे आपकी पहचान सबसे अलग रहेगी। यह भी देखें कि आपके बिजनेस का नाम आकर्षक हो।

क्या आप नया ट्रक खरीदना या पुराना ट्रक बेचना चाहते हैं, किफायती मालाभाड़ा से फायदा उठाना चाहते हैं, ट्रक पर लोन, फाइनेंस, इंश्योरेंस व अन्य सुविधाएं बस एक क्लिक पर चाहते हैं तो देश के सबसे तेजी से आगे बढ़ते डिजिटल प्लेटफार्म ट्रक जंक्शन पर लॉगिन करें और अपने फायदे की हर बात जानें।

Mutual Fund: म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में अपनाएं डायवर्सिफाई रणनीति, होगा भारी मुनाफा

म्यूचुअल फंड उच्च रिटर्न के लिए अपनाए डायवर्सिफाई पोर्टफोलियो

Mutual Fund : म्यूचुअल फंड निवेश के लिए एक बढ़िया कदम है. इसके उच्च रिटर्न और कम जोखिम सभी को खूब भाता है. परन्तु आज हम आपको म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के ऐसी रणनीति के बारे में बताएंगे, जिसमे न्यूनतम जोखिम में अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.

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आमतौर पर लोग अपने अधिक से अधिक पैसे, किसी एक म्यूचुअल फंड (जिसे वे कुछ ज्यादा ही पसंद करते हैं) में डाल देते हैं. जो एक सहीं रणनीति नहीं है. हम बात कर रहे है डायवर्सिफाई निति की.

मेरा एक दोस्त है, जो जाने-माने बैंक में कैशियर है. वह इनवेस्टमेंट की अहमियत को अच्छे से जानता है. तथा आय दिन वह स्टॉक मार्केट में निवेश करता रहता था. वह हर महीने कोई ना कोई आईटी शेयर खरीदता था,

इस प्रकार इन्वेस्टमेंट करते-करते उसने अपने 10 लाख रूपये स्टॉक मार्केट में लगाए, इन इन्वेस्टमेंट के पीछे उसका एक अहम उदेश्य था और वह था उसके शादी का प्लान, उसकी शादी मार्च 2020 में होनी थी, लेकिन उसी समय कोरोना महामारी के कारण मार्केट क्रैश हो गया.

मेरे दोस्त के पोर्टफोलियों में रखे सारे शेयर काफी डाउन जा चुके थे, ऐसे में वह अगर अपना पैसा निकालता तब उसे भारी नुकशान उठाना पड़ता, नतीजन उसे अपने शादी के प्लान को टालना पड़ा,

अगर उसने अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई किया होता, तो उसे अपनी शादी नहीं टालना पड़ता और उसका पोर्टफोलियों इतना नीचे नहीं जाता.

जानिए डाइवर्सिफिकेशन क्या है?

रणनीति क्या है

विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) एक शब्द है जिसका उपयोग फाइनेंस की दुनिया में जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार की परिसंपत्तियों में निवेश की निवेश रणनीति का वर्णन करने के लिए किया जाता है.

यह रणनीति अक्सर उन निवेशकों द्वारा नियोजित की जाती है जो शेयर बाजार की अस्थिरता से अपने पोर्टफोलियो सुरक्षित करना चाहते हैं.

अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाकर, निवेशक किसी एक फंड में अपने पैसे लगाने जैसे गलतियों से बचते हैं. उदाहरण के लिए, एक निवेशक जो स्टॉक और बॉन्ड दोनों में निवेश करके अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाता है, उस निवेशक की तुलना में शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होगा जो केवल शेयरों में निवेश करता है.

अपना फाइनेंसियल गोल्स सेट करें

जब आप अपने लिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) पोर्टफोलियो बनाते हैं तब, अपने लक्ष्य (Goal) जरूर सेट करें, जोखिम का आंकलन करें, कम जोखिम में सुरक्षित निवेश के लिए तथा एक बेहतर पोर्टफोलियो बनाने के लिए कई प्रकार के वेबसाइट और एप्स आपकी मदद कर सकती है. उनका उपयोग अवश्य करें.

अपना पोर्टफोलियो कैसे बनायें

आप अपने पोर्टफोलियो में लार्ज, मिड और स्मॉल कैप इन तीनों प्रकार के फंड्स का चुनाव करें, साथ ही यूएस, यूरोप और दूसरे बाजारों के स्टॉक्स व फंड अपने पोर्टफोलियो में शामिल करें.

इसके अलावा इक्विटी, डेट और गोल्ड तीनों तरह के फंड्स से डाइवर्सिफाई पोर्टफोलियो बनाये, इस प्रकार फाइनेंसियल प्लानिंग के साथ आप बेहतर म्यूचुअल फंड, जिसमे कम जोखिम और अधिक मुनाफा शामिल है का चुनाव कर सकते हैं.

फंड के विभिन्न प्रकारों को जानें

इक्विटी, डेट और गोल्ड फंड्स अलग-अलग प्रकारों के साथ आता है. इक्विटी फंड्स की 11 प्रकार हैं. आप विभिन्न मार्केट कैप जैसे- लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, फ्लेक्सी कैप या मल्टी कैप में पैसा लगा सकते हैं.

हालांकि इक्विटी फंड्स में अधिक जोखिम शामिल है. डेट फंड 16 कैटेगरीज ऑफर करता है. या कम जोखिम प्रदान करता है. बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए आपको गोल्ड से जुड़े फंड्स में भी पैसा लगाना चाहिए.

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सलाह – अगर आप म्यूचुअल फंड निवेश के लिए बेहतर प्लेटफार्म ढूंढ रहे हैं तो हम आपको म्यूचुअल फंड के साथ स्टॉक में निवेश के लिए Best Demat Account प्लेटफार्म के बारे में बताने वाले हैं.

जिसे बहुत ही आसानी से किसी अन्य प्लेटफार्म की तुलना में शुरू किया जा सकता है. वह भी बिना किसी डीमेट अकाउंट Open शुल्क के. डीमेट अकाउंट खोलने के लिए Angel One app डाऊनलोड करें, साथ ही म्यूचुअल फंड निवेश के लिए Angel BEE App का इस्तेमाल करें.

मुनाफे में यूरोप बचाव कोष

यूरोप वित्तीय संकट से उबर नहीं पा रहा है और बचत करने वाले इतने परेशान हैं कि वे अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए ब्याज पाने के बदले फीस देने के लिए भी तैयार हैं. यूरो बचाव कोष को भी इससे फायदा हो रहा है.

वित्तीय बाजार के अंदाज निराले हैं. यूरो जोन में माइनस ब्याज दर अपने मुनाफे को कैसे सुरक्षित करें? वाले क्लब के सदस्यों की तादाद बढ़ रही है. पहले जर्मनी, हॉलैंड और फ्रांस ऐसे देश थे, जहां निवेशक अपना पैसा ब्याज के बिना भी लगा रहे थे. अब इस कतार में यूरोपीय बचाव कोष ईएफएसएफ और बेल्जियम भी शामिल हो गया है. अब वे शॉर्ट टर्म बांड बेचकर धन कमा रहे हैं. मतलब यह हुआ कि स्पेन और इटली जैसे संकट में फंसे देशों को अपने बॉन्ड पर सात फीसदी से ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है जबकि बेल्जियम को कर्ज देने के लिए निवेशक खुद फीस दे रहे हैं.

आर्थिक रूप से सुदृढ़ देशों के बॉन्ड की मांग इसलिए बढ़ रही है कि एक ओर तो यूरोपीय केंद्रीय बैंक ब्याज दर कम रख रहा है और दूसरी ओर वह बाजार में बड़े पैमाने पर पैसा झोंक रहा है. ताकि मुद्रा प्रवाह का संकट पैदा न हो. वह बैंकों और बड़े निवेशकों के लिए अपने अतिरिक्त धन को कहीं थोड़े समय के लिए रखने की संभावना को मुश्किल बना रहा है, जिससे मुनाफे का हिस्सा कम हो रहा है. पिछले समय में इटली और स्पेन को भी सस्ते में नया धन मिला है, लेकिन विशेषज्ञ फिर भी हालात को गंभीर बता रहे हैं.

यूरोपीय बचाव कोष ईएफएसएफ ने छह महीने के लिए बॉन्ड बेचा है जिस पर निवेशकों को 0.0113 फीसदी का नुकसान होगा. लक्जेमबर्ग की एक वित्तीय सोसायटी ने 1.49 अरब यूरो के बॉन्ड खरीदे हैं. यूरो देशों की ओर से ईएफएसएफ वित्तीय संकट झेल रहे देशों की बचाव पैकेज के अंतर्गत मदद कर रहा है.

इसके पहले बेल्जियम ने माइनस ब्याज दर पर छोटी अवधि के लिए बाजार से तीन अरब यूरो जुटाया. तीन महीने के बॉन्ड पर निवेशकों का मुनाफा माइनस 0.016 फीसदी होगा. 12 महीने के बॉन्ड पर ब्याज 0.04 फीसदी रही. पिछले सप्ताह फ्रांस को भी बजट के लिए निवेशकों से बिना कोई खर्च किए पैसा जुटाने में सफलता मिली थी. जर्मन बॉन्ड तो बाजार में इतने लोकप्रिय हैं कि दो साल के बॉन्ड के लिए जर्मनी को कोई ब्याज नहीं देना पड़ रहा है.

विशेषज्ञ बॉन्ड की बिक्री में माइनस ब्याज दर और यूरोपीय बैंक द्वारा हाल में ब्याज दर घटाये जाने के बीच संबंध देखते हैं. मुनाफा कमाने की कम होती संभावना के बीच प्लस ब्याज दर के लिए दौड़ तेज हो रही है, जिसका फायदा पिछले दिनों स्पेन और इटली को भी हुआ है. स्पेन ने मंगलवार को 12 से 18 महीने के बॉन्ड की नीलामी से सस्ते में 3.56 अरब यूरो जुटाया है. इसलिए विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक कम ब्याज दर के कारण लंबे समय के कर्ज का रास्ता बंद रहेगा, संकट में पड़े देशों की हालत गंभीर बनी रहेगी.

ब्रिटेन में तो बैंकों से यह टेस्ट करने को कहा गया है कि यदि यूरो जोन के कुछ देश साझा मुद्रा से बाहर निकल जाते हैं तो वे इस हालत से कैसे निबटेंगे. ब्रिटेन की नियामक संस्था एफएसए के प्रमुख एडेयर टर्नर ने कहा है कि ब्रिटेन के बैंकों के उनकी संपत्ति और कर्ज के दूसरी मुद्री में बदलने से होने वाली समस्या के बारे में सोचना होगा, अपने मुनाफे को कैसे सुरक्षित करें? भले ही इसकी संभावना बहुत कम है. टर्नर ने संसदीय समिति से कहा कि हमने उनसे ग्रीस, स्पेन, इटली, पुर्तगाल और आयरलैंड के लिए इस तरह के परिदृश्य पर सोचने के लिए कहा है.

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