ध्यान रहे ये बच्चे ​भविष्य के कामगार हैं। इन तमाम कारकों के साथ एक देश अपने उभार की गति न तो बढ़ा सकता है और न ही उसे बरकरार रख सकता है। तीसरी तरह के मुद्दे भी हैं जो व्यवस्थागत निगरानी के सीमित दायरे से संबद्ध हैं। इनका काम प्राथमिक चूकों को रोकना होता है।

कल आज और कल

एक वक्त था जब संघर्ष से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले सदिच्छा से भरे पर्यवेक्षक कहा करते थे कि देश को लेकर वे अल्पकालिक रूप से निराशावादी नजरिया रखते हैं लेकिन दीर्घाव​धि को लेकर वे आशा​न्वित हैं।

अब इस दृ​ ष्टिकोण का अनपे​क्षित विपरीत देखने को मिल सकता है। कई लोग अल्पाव​धि को लेकर आशावादी लेकिन दीर्घाव​धि को लेकर निराशा से ​घिरे हैं। आप कह सकते हैं कि अगर हम अल्पाव​धि की घटनाओं का ध्यान रखें तो दीर्घावधि स्वयं अपना ध्यान रख लेगी। ऐसे में इस दलील पर गौर कीजिए।

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था है। यह सबसे तेज गति से विकसित होती बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह तेजी ऐसे कठिन समय में हासिल है जब जापान और ब्रिटेन तक की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट आ रही है और पिछली तिमाही तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी इसी दौर से गुजर रही थी।

ट्रेडिंग करते समय ध्यान केंद्रित रखें

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एसपी माइंस में 11वें वेतन वेज ट्रेडिंग करते समय ध्यान केंद्रित रखें बोर्ड की मांग को प्रदर्शन

एसपी माइंस में 11वें वेतन वेज बोर्ड की मांग को प्रदर्शन

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत एसपी माइंस चितरा कोलियरी में संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा द्वारा 11वें वेतन वेज बोर्ड समझौता के लिए होनी वाली बैठक में विलंब को लेकर केंद्रीय कमेटी के निर्देश पर शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा में शामिल एटक, सीटू, जेसीएमयू सहित अन्य यूनियन के नेताओं ने कोल कर्मचारियों के साथ कोलियरी के वर्कशॉप के समीप गेट मीटिंग की गयी। उसके बाद जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए कोलियरी के क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य द्वार पर कोल इंडिया प्रबंधन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया गया। मौके पर यूनियन नेता रामदेव सिंह, पशुपति कोल, केशव नारायण सिंह, होपना मरांडी, निर्मल मरांडी, सुबोध महतो आदि ने अपने संबोधन में एक ही मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि 11वां वेतन वेज बोर्ड समझौता के लिए होनी वाली बैठक में लगातार विलंब हो रही है। इससे कोलियरी के कोयलाकर्मियों को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है। कहा कि 11वें वेतन वेज बोर्ड समझौता के लिए अब तक सात बार बैठक की गई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम निकलकर नहीं आया। यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के इशारे पर कोल इंडिया प्रबंधन बैठक में विलंब कर कोलकर्मियों को उनके अधिकार से वंचित रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 11वें वेतन वेज बोर्ड समझौता के लिए बैठक सुनिश्चित की जाय और अविलंब 11वें वेतन वेज बोर्ड लागू किया जाय, अन्यथा आने वाले समय में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। विरोध-प्रदर्शन के बाद कोल इंडिया के नाम एक सूत्री मांग पत्र कोलियरी महाप्रबंधक को को संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा द्वारा सौंपा गया। मौके पर दिनेश महतो, पूरण सिंह मेलर, श्याम सुंदर तिवारी, सचिन राय, नित्यानंद मिश्रा, मनोज कुमार, प्रभु कोल, सजनी किस्कू, नंदकिशोर मुर्मू, लक्ष्मण दास, सुधीर दास, राजू दास, ट्रेडिंग करते समय ध्यान केंद्रित रखें गणेश रजक, बी के सिंह, जुगल रजक, फणिभूषण महतो, लाल हेंब्रम सहित अन्य मौजूद थे।

बिल्कीस बानो की याचिका पर 13 दिसंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट 2002 के गुजरात दंगों की पीड़िता बिल्कीस बानो की याचिका पर 13 दिसंबर को सुनवाई करेगा, जिन्होंने मामले में राज्य सरकार द्वारा 11 दोषियों की सजा माफ करने को चुनौती दी है। बानो दंगों के दौरान बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ के बानो की याचिका पर विचार करने की संभावना है। बानो ने एक दोषी की याचिका पर शीर्ष अदालत के 13 मई, 2022 के आदेश की समीक्षा के लिए एक अलग अर्जी भी दायर की है।

शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार से नौ जुलाई, 1992 की नीति के तहत दोषियों की समय से पूर्व रिहाई की याचिका पर दो महीने के भीतर विचार करने को कहा था। 15 अगस्त को दोषियों की रिहाई के लिए दी गई माफी के खिलाफ अपनी याचिका में बानो ने कहा कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून की जरूरतों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए आदेश पारित किया। याचिका में कहा गया है, ‘‘बिल्कीस बानो के मामले में दोषियों की समय से पहले रिहाई ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख ट्रेडिंग करते समय ध्यान केंद्रित रखें दिया है और इसके परिणामस्वरूप देश भर में प्रदर्शन हुए हैं।''

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