क्या ब्रोकर आपका पैसा चुरा सकते हैं?

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जिस ट्रेडिंग कंपनी के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगा रहे, वही बंद हो गई तो क्‍या होगा? जानिए आपका पैसा डूबेगा या बचा रहेगा

शेयर बाजार में निवेश करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यहां पर पारंपरिक निवेश की तुलना में ज्‍यादा रिटर्न मिलता है. हालांकि, शेयर बाजार में निवेश का जोखिम भी होता है.

जिस ट्रेडिंग कंपनी के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगा रहे, वही बंद हो गई तो क्‍या होगा? जानिए आपका पैसा डूबेगा या बचा रहेगा

अब आम आदमी भी शेयर बाजार में निवेश कर ज्‍यादा रिटर्न पाने में रुचि दिखा रहा है. यही कारण है कि बीते एक साल में रिकॉर्ड संख्‍या में डीमैट अकाउंट खोले गए हैं. पिछले महीने तक के आंकड़ों के अनुसार देशभर में करीब 6.9 करोड़ डीमैट अकांउट्स हैं. हालांकि, दूसरे देशों के मुकाबले आबादी के लिहाज से यह अनुपात अभी भी बहुत कम है. भारतीय शेयर बाजार में सबसे ज्‍यादा पैसा महाराष्‍ट्र, गुजरात और उत्‍तर प्रदेश के लोग लगाते हैं. लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार से लेकर मिज़ोरम तक के लोग शेयर बाजार से अच्‍छी कमाई कर रहे हैं.

शेयर बाजार में निवेश करने के लिए सबसे पहली जरूरत डीमैट अकाउंट की होती है. इसी अकाउंट में शेयर्स, ईटीएफ, बॉन्‍ड्स, म्‍यूचुअल फंड्स और सिक्योरिटीज को इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्मेट में रखा जाता है. ये डीमैट अकाउंट डिपॉजिटरीज एनसडीएल और सीडीएसल के साथ खोला जा सकता है. देश में कई स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनियां हैं, जो लोगों को शेयर बाजार में निवेश करने में मदद करती हैं. स्‍टॉक क्या ब्रोकर आपका पैसा चुरा सकते हैं? ब्रोकिंग कंपनियां ही इस सुविधा को आम आदमी तक पहुंचाती हैं. इस सुविधा के बदले ये ब्रोकरेज फर्म्‍स छोटी फीस वसूलते हैं.

इस बात की भी संभावना है कि आप ये ब्रोकरेज फर्म्‍स ही किन्‍हीं कारणों से बंद हो जाए. ऐसी स्थिति में क्‍या आपका निवेश पूरी तरह से डूब जाएगा? कहीं स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनी आपका पूरा पैसा लेकर तो नहीं भाग जाएगी? एक निवेशक के तौर पर आपके मन में जरूर इस तरह के सवाल उठ रहे होंगे. लेकिन अब आपको इसकी चिंता नहीं करनी हैं. क्‍योंकि हम आपको इस तरह के सभी सवालों के जवाब लेकर आए हैं.

ब्रोकरेज कंपनी बंद होने पर आपके निवेश का क्‍या होगा?

आप यह जानकार राहत की सांस ले सकते हैं कि स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनी के डिफॉल्‍ट करने या बंद होने के बाद भी आपकी पूंजी या फंड पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा. ऐसा नहीं होगा कि स्‍टॉक ब्रोकर आपकी पूंजी लेकर भाग जाए. उदाहरण के तौर पर देखें तो जब हर्षद मेहता स्‍कैम सामने आया था, तब उनकी ब्रोकिंग कंपनी ग्रो मोर रिसर्च एंड एसेट मैनेजमेंट को सेबी ने बैन कर दिया था. लेकिन इस कंपनी के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोगों को कोई नुकसान नहीं हुआ.

आपको सबसे पहले यह समझने की जरूरत कि ये स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनियां महज एक बिचौलिए के तौर पर काम करती हैं. आपके फंड पर इनकी पहुंच सीधे तौर पर नहीं होती है ताकि वे आपकी पूंजी पर अपना हम जमा सकें. लेकिन इनके पास पड़ी अपनी फंड या पूंजी को इस्‍तेमाल करने के लिए आप इन्‍हें निर्देश दे सकते हैं.

स्‍टॉक्‍स और शेयरों का क्‍या होगा?

आपका फंड डीमैट अकाउंट में जमा होता है. ये डीमैट अकाउंट डिपॉजिटरीज के पास खुलात है. सेबी ने दो डिपॉजिटरीज – नेशनल सिक्‍योरिटीज डिपॉजिटरीज लिमिटेड (NSDL) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) को मंजूरी दी है. भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय के प्रति सेबी की जवाबदेही होती है.

किसी भी समय पर एक निवेशक का स्‍टॉक या शेयर ब्रोकरेज फर्म्‍स के पास नहीं होता है. वे बस एक प्‍लेटफॉर्म के तौर पर काम करते हैं. इनका काम बस आपके निर्देश के हिसाब से आपकी जगह ट्रेड करना है. बदले में ये आपसे फीस वसूलते हैं.

इसी प्रकार आपका म्‍यूचुअल फंड इन्‍वेस्‍टमेंट एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के पास होता है. ऐसे में अगर ब्रोकरेज फर्म बंद भी हो जाता है तो आपका म्‍यूचुअल फंड सुरक्षित रहेगा.

ATM से कोई आपका पैसा निकाल ले तो बैंक की क्या है जिम्मेदारी?

एटीएम से अगर कोई गलत तरीके से आपका पैसा निकाल ले तो क्या होगा ? दरअसल तकनीक के इस दौर में फ्रॉड भी कई तरह से हो रहे हैं.

ATM से कोई आपका पैसा निकाल ले तो बैंक की क्या है जिम्मेदारी?

आरबीआई के नए नियमों के बाद, अनाधिकृत लेनदेन में बैकों और ग्राहकों की जिम्मेदारी निर्धारित हो गई है. इसमें डिजिटल माध्यम से बैक खातों की सभी लेनदेन शामिल हैं. ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते दौर में जानिए किस मामले में बैंक और ग्राहक की कितनी जिम्मेदारी है:

1. बैंक की गलती पर ग्राहक की जिम्मेदारी नहीं
एक ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य हो जाती है, यदि अनाधिकृत लेन-देन बैंक की गलती से हुआ हो. इसमें सम्मिलित फ्रॉड, लापरवाही, अस्वीकृती जैसी तमाम चीजें शामिल हैं. इसके लिए बैंक को रिपोर्ट करना भी जरूरी नहीं हैं.

यदि थर्ड पार्टी लेनदेन के दौरान बैंक या ग्राहक दोनों की ही गलती न होकर, सिस्टम में कोई दोष हो और ग्राहक इस अनाधिकृत लेनदेन की जानकारी बैंक को तीन कामकाजी दिनों के भीतर दे देता है, तो भी उसकी देयता शून्य मानी जाती है.

ATM

2. इन मामलों में ग्राहक की कितनी जिम्मेदारी
अनाधिकृत लेनदेन में एक ग्राहक की देयता दो तरह के मामलों में अलग-अलग होती है:

  • यदि ग्राहक द्वारा लापरवाही बरती गई हो, मसलन उसने अपने पेमेंट की जानकारी किसी के साथ साझा की हो और इसकी जानकारी बैंक को न दी हो, तो इस स्थिति में ग्राहक को ही पूरे नुकसान का सहना होगा. बैंक को जानकारी देने के बाद भी यदि ग्राहक को नुकसान होता है, तो इसकी देयता बैंक की है.
  • किसी अनाधिकृत लेनदेन में बैंक या ग्राहक दोनों ही गलती न हो, मगर ग्राहक के रिपोर्ट कर देने बाद भी सिस्टम में देरी हो (चार से सात कारोबारी दिनों की), तो ऐसी स्थिति में भी ग्राहक की देयता सीमित मानी जाती है.

इसके अतिरिक्त, यदि रिपोर्ट की जानदारी देने में सात कामकाजी दिनों से अधिक की देरी हो, तो ग्राहक की देयता बैंक के बोर्ड द्वारा स्वीकृत पॉलिसी के आधार पर होगी. बैंकों द्वारा इस पॉलिसी की जानकारी ग्राहकों को खाता खुलवाने के समय दी जानी अनिवार्य है.

आरबीआई के अनुसार, बैंकों को इस जानकारी को सार्वजनिक करना भी अनिवार्य है. मौजूद ग्राहकों को भी इस जानकारी या इसमें संशोधन के बारे में अलग से बताना जरूरी है. इस बार में अधिक जानकारी के लिए आप आरबीआई की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं.


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हैकर्स ने अपस्टॉक्स को बनाया क्या ब्रोकर आपका पैसा चुरा सकते हैं? निशाना, चुराए 25 लाख ग्राहकों के डेटा

ब्रोकिंग फर्म अपस्टॉक्स के निवेशकों के लिए बुरी खबर है. हैकर्स ने इस ब्रोकर के सिक्योरिटी सिस्टम में सेंध लगाई है. उन्होंने लाखों ग्राहकों के डेटा चुरा लिए हैं.

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ग्राहक संख्या के आधार पर अपस्टॉक्स देश की दूसरी सबसे बड़ी स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी है. हैकर्स ने कंपनी के 25 लाख ग्राहकों की केवायसी और अन्य डेटा चुराए हैं.

शनिवार को अपस्टॉक्स ने कहा कि उसे उसकी वेबसाइट के अनाधिकृत इस्तेमाल से जुड़े इमेल मिल रहे हैं. कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ रवि कुमार ने कहा, "इससे यह संकेत मिलता है कि कई ग्राहकों को डेटा और केवायसी की जानकारी चुराई गई है."

शनिवार को कई वेब सिक्योरिटी सलाहकारों ने ट्वीट कर इस सेंधमारी की जानकारी दी. सूत्रों ने कहा कि यह उल्लंघन थर्ड-पार्टी डेटा वेयरहाउस से हुआ है और इससे जुड़ी फाइल को बिक्री के लिए डार्क वेब पर पेश किया गया है.

इस घटना के बाद अपस्टॉक्स ने तुरंत प्रभावित डेटाबेस के उपयोग पर रोक लगा दी और अपने सुरक्षा के इंतजामों को अथिक पुख्ता कर दिया. इसके अलावा, कंपनी ने रियल टाइम आधारित 24x7 निगरानी और रिंग फेन्स्ड नेटवर्क लागू कर दिया है.

कुमार ने कहा, "अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए हमने सुरक्षा के लिए ओटीपी आधारित पासवर्ड रिसेट प्रक्रिया शुरू कर दी है. हम आपको यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि आपके फंड और शेयर पूरी तरह सुरक्षति हैं. आपका पैसा सिर्फ आप ही के बैंक खाते में जमा हो सकता है और शेयर संबंधित डिपोजिटरी के पास सुरक्षित हैं."

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राशिफल ऐप, फोटो एडिटर, कैमरा ऐप, वीपीएन सर्विस और फिटनेस ट्रैकिंग ऐप से चोरी होते हैं यूजर्स के डेटा

गूगल प्ले स्टोर और एप्पल प्ले स्टोर पर धोखाधड़ी करने वाले कई ऐप फोटो एडिटर, मोबाइल गेम, हेल्थ ट्रैकर्स के रूप में उपलब्ध थे। इस तरह के ऐप्स अक्सर गेम, एडिटर जैसे ऐप से झांसे में आ जाते हैं।

राशिफल ऐप, फोटो एडिटर, कैमरा ऐप, वीपीएन सर्विस और फिटनेस ट्रैकिंग ऐप से चोरी होते हैं यूजर्स के डेटा

फेसबुक यानी मेटा (Meta) ने हाल ही में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि फेसबुक के 10 लाख से अधिक यूजर्स के खातों की जानकारी पासवर्ड के साथ लीक हुई है। कंपनी के मुताबिक, यह डेटा करीब 400 ऐप के जरिए लीक हुआ है। इनमें धोखाधड़ी करने वाले ऐप शामिल हैं। आइए, जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और इससे कैसे बचें.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल प्ले स्टोर और एप्पल प्ले स्टोर पर धोखाधड़ी करने वाले कई ऐप फोटो एडिटर, मोबाइल गेम, हेल्थ ट्रैकर्स के रूप में उपलब्ध थे। इस तरह के ऐप्स अक्सर गेम, एडिटर और अन्य के रूप में अपेक्षा के अनुरूप काम करते हैं, जिससे ज्यादातर लोग संदेह नहीं करते और झांसे में आ जाते हैं।

लॉगिन करवाने के बाद काम नहीं करते

ये ऐप यूजर्स के फेसबुक अकाउंट के जरिए लॉगिन करवा रहे थे। इसके बाद ये तमाम तरह के एक्सेस ले रहे थे। मेटा के थ्रेट डिसरप्शन के डायरेक्टर डेविड एग्रानोविच के मुताबिक, ये ऐप फेसबुक अकाउंट के जरिए लॉगिन तो करवाते ही थे, लेकिन लॉगिन हो जाने के बाद काम ही नहीं करते थे। उन्होंने कहा, डेटा चुराने वाले जानते हैं कि इस तरह के ऐप कितने लोकप्रिय हैं, इसलिए डेटा चुराने के लिए ऐसी ही समान प्रणाली का उपयोग करते हैं।

इन ऐप के जरिए ज्यादातर यूजर्स का डेटा चोरी हुआ

जिन ऐप के जरिए ज्यादातर फेसबुक यूजर्स के डेटा की जानकारी चोरी हुई क्या ब्रोकर आपका पैसा चुरा सकते हैं? है, उनमें फोटो एडिटर, कैमरा ऐप, वीपीएन सर्विस, राशिफल ऐप और फिटनेस ट्रैकिंग ऐप शामिल हैं। इस तरह के एंड्रॉयड ऐप की संख्या ज्यादा थी। डेटा चोरी करने वाले अधिकतर ऐप फोटो फिल्टर और बिजनेस यूटिलिटी वाले थे। इनके क्या ब्रोकर आपका पैसा चुरा सकते हैं? नाम मेटा बिजनेस, एफबी एनेलिटिक आदि थे, जिसकी वजह से यूजर्स भ्रमित हुए।

धोखाधड़ी होने पर क्या करना चाहिए?

किसी भी तरह का डेटा चोरी होने पर सबसे पहले सभी डिवाइस से अपने अकाउंट को लॉगआउट कर देना चाहिए और अपने पासवर्ड को बदलना चाहिए। पासवर्ड में नाम, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

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