ओवेरियन कैंसर महिलाओं को होने वाली एक गंभीर बीमारी है। (Image: Freepik)

एक सफल उद्यमी की विशेषता क्या है?

इसे सुनेंरोकेंउद्यमी मे कल्पना शक्ति अवश्य होनी चाहिए। इसी के आधार पर साहसी उपक्रम की कल्पना करता है, उसको मूर्त रूप देता है, व्यवसाय संचालन की योजना बनाता है तथा उसी के अनुसार कार्य करता है। लेकिन उद्यमी की कल्पना शक्ति तथा उच्च महत्वाकांक्षा वास्तविक परिस्थितियों को मध्यनजर रखते हुए होनी चाहिए।

उद्यमी की आधुनिक अवधारणा क्या है स्पष्ट कीजिए?

इसे सुनेंरोकेंउद्यमिता की अवधारणा एक विशेष कौशल या उत्पादन एक सफल व्यापारी के लक्षण के कारकों को जुटाने की क्षमता को संदर्भित करती है – भूमि, श्रम और पूंजी और उन्हें नए माल और सेवाओं का उत्पादन करने के लिए उपयोग करना। किसी भी देश में प्रारंभिक औद्योगिक विकास और व्यापार और उसके बाद के नवाचार का इतिहास काफी हद तक अपने उद्यमियों का इतिहास है।

उद्यमी का क्या अर्थ है उसकी मुख्य विशेषताओं की चर्चा करें?

इसे सुनेंरोकेंउत्तर : उद्यमी का अर्थ प्रायः उद्यमी उस व्यक्ति को कहा जाता है जो नया उपक्रम प्रारंभ करता है, जरूरी संसाधनों को जुटाता है एवं व्यवसाय की क्रियाओं का प्रबंधत था नियंत्रण करता है। वह व्यवसाय की विभिन्न जोखिमों को झेलता है एवं व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करता है। जोखिम वहन करना उद्यमी का मुख्य कार्य है।

उद्यमी की समस्याएं कौन सी है?

इसे सुनेंरोकेंएक उद्यमी के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है अपने द्वारा बेचे जाने वाले माल का “विपणन” करना। यदि उद्यमी के उधमीय क्षेत्र मे विपणन की सुविधाएं उपलब्ध नही है अथवा अभाव है तो उद्यमी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उसे अपने माल का विपणन करने के लिए अन्यत्र व्यवस्था करनी होती है।

एक देश के लिए उद्यमी की जरूरत क्या है?

इसे सुनेंरोकेंकिसी भी देश की आर्थिक प्रगति के लिए, उद्यमिता सबसे शक्तिशाली बल और साधन के रूप में एक सफल व्यापारी के लक्षण कार्य करती है। उद्यमशीलता आर्थिक विकास के केंद्र में है। तथ्य की बात के रूप में, उच्च उद्यमशीलता का स्तर है; तेजी से आर्थिक विकास का स्तर है। एक उद्यमी धन का निर्माता है और आर्थिक विकास की कुंजी है।

उद्यमिता का क्या महत्व है समझाइए?

इसे सुनेंरोकेंउद्यमिता से लोगों मे साहसिक प्रवृत्तियों का जन्म होता है तथा लोगों मे सृजनशीलता के प्रति विश्वास बढ़ता है। इससे व्यक्ति व्यावसायिक सुअवसरों की खोज करके उनका विदोहन करने के लिए नये-नये उधोगों की स्थापना करता है। इस तरह देश मे औधोगिक क्रियाओं को प्रोत्साहन मिलता है एवं आर्थिक विकास की गति तीव्र हो जाती है।

उदमी से क्या आशय है?

इसे सुनेंरोकें’उद्यमी’ शब्द फ्रेंस भाषा के ‘Entreprendre’ शब्द से लिया गया है, जिसका आशय कार्य उद्यम या व्यवसाय करना होता है उद्यमिता से आशय व्यक्ति की उस प्रवृत्ति या योग्यता से है, जो किसी व्यवसाय में निहित जोखिमों व अनिश्चितताओं को वहन करते हुए, उसका सफल संचालन किया जाता है उद्यमी जोखिमों व अनिश्चितता को वहन करने के साथ-साथ …

उद्यमी से क्या आशय है इसके क्या कार्य है?

उद्यमिता का क्या महत्व एक सफल व्यापारी के लक्षण है?

इसे सुनेंरोकें2। खतरे को लेकर भयभीत नहीं उद्यमियों को जोखिम लेने वाले होते हैं, अनिश्चितता के भविष्य में गहराई से आगे बढ़ने के लिए तैयार होते हैं। लेकिन सभी जोखिम लेने वाले सफल उद्यमी नहीं हैं जोखिम के मामले में आराम से एक सफल उद्यमी क्या भिन्न करता है?

एक सफल उद्यमी की विशेषताएं या लक्षण क्या हैं सबसे अच्छा विकल्प चुनें?

उद्यमी हमेशा चीजों को करने के नए तरीकों की तलाश में रहते हैं और वे उन्हें कैसे बेहतर बना सकते हैं।…यहाँ किस विशेषता की चर्चा की जा रही है?.

  • Communication Skills संचार कौशल
  • Strong Technical Knowledge मजबूत तकनीकी ज्ञान
  • Creativity रचनात्मकता
  • Risk- Taker. जोखिम लेने वाला।

सफल व्यापारी के आवश्यक गुण क्या है?

इसे सुनेंरोकेंव्यवसायी को अपने व्यवसाय के बारे में पूरी समझ होनी चाहिए। उसे व्यवसाय के उद्देश्य और उद्देश्यों के बारे में स्पष्ट होना चाहिए। व्यवसाय के ज्ञान को वित्त, विपणन और व्यापारिक एक सफल व्यापारी के लक्षण कानूनों के ज्ञान द्वारा पूरक होना चाहिए। जटिल व्यवसाय की समस्याओं से निपटने के लिए इन सभी पहलुओं का ज्ञान आवश्यक है।

उद्यमियों को बड़े होने का लालच नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके लिए धैर्य की भी आवश्यकता होती है true सही false गलत?

इसे सुनेंरोकेंसत्य (TRUE) उद्यमियों को बड़े होने का लालच नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके लिए धैर्य की भी आवश्यकता होती है। (Entrepreneurs should not be greedy to grow big, as this needs patience as well.)

महिलाओं में दिखें ये 10 लक्षण तो नहीं करना चाहिए इग्नोर, हो सकती हैं गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं!

आज हम आपको महिलाओं के सेहत से जुड़े 10 लक्षण बता रहे हैं, जिन्हे महिलाओं को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

महिलाओं में दिखें ये 10 लक्षण तो नहीं करना चाहिए इग्नोर, हो सकती हैं गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं!

ओवेरियन कैंसर महिलाओं को होने वाली एक गंभीर बीमारी है। (Image: Freepik)

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई इतना व्यस्त हो गया है कि अपनी हेल्थ का लोग अच्छे से ध्यान नहीं एक सफल व्यापारी के लक्षण एक सफल व्यापारी के लक्षण रख पाते हैं। महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों को संभालते-संभालते अक्सर छोटी- मोटी बीमारियों को इग्नोर कर देती हैं। बाद में यही बीमारियां काफी खतरनाक साबित हो सकती हैं। बता दें कि लम्बे समय तक थकान , जुकाम, सिर-दर्द आदि आगे चलकर यही छोटे-मोटे लक्षण हमारे शरीर में एक गंभीर बीमारी का रूप ले लेते हैं। आइए जानते हैं उन लक्षणों के बारे में जो आगे चलकर महिलाओं के लिए बड़ी परेशानियां खड़ी कर सकती हैं।

वजन में बदलाव: अचानक से वजन का बढ़ना या घटना भी कई बड़ी बीमारियों के लक्षण हैं। अगर आपका वजन अचानक से बढ़ जाता है तो ये सब थायराइड और डिप्रेशन जैसी परेशानियों के लक्षण हैं। वहीं दूसरी ओर अचानक से वजन का कम होना डायबिटीज, लिवर व कैंसर जैसी बीमारियों का भी संकेत है।

थकान लगना: अगर आपको बहुत लम्बे समय से ज्यादा थकान की शिकायत है तो आप मेटाबोलिस्म डिसआर्डर जैसी परेशानी से पीड़ित हो सकती हैं। किसी काम के बाद थकान का होना आम बात है; लेकिन बार-बार और हर समय थका हुआ महसूस करना एक परेशानी हो सकती है।

MAMTA BANERJEE

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चेस्ट में दर्द महसूस होना: अगर आपको चेस्ट में दर्द महसूस होता है, हार्टबीट का तेज़ी से बढ़ना, सांस लेने में तकलीफ होना आदि जैसे लक्षण फील हो रहे हैं तो इन्हे आप बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। क्योंकि इन सभी कारणों से ही आपको कोई बड़ी हार्ट डिजीज हो सकती है।

देखने में समस्या: नजर का कमजोर होना भी कोई आम बात नहीं है अगर आपको देखने में सबकुछ ब्लर या साफ़ नजर नहीं आ रहा है; तो ये भी स्ट्रोक के लक्षण हैं। इस प्रकार के किसी भी लक्षण को हल्के में न ले और सावधानी बरतें।

त्वचा का रंग बदलना: अगर आपकी त्वचा में आपको कुछ बदलाव नजर आते हैं जैसे कि त्वचा का रंग काला पड़ना या त्वचा पर निशान होना तो ये सब भी डायबिटीज के लक्षण हो सकते हैं। बदलते मौसम में अपनी त्वचा का ज्यादा ध्यान रखें और किसी भी प्रकार के बदलाव महसूस होने पर डॉक्टर को अवश्य दिखाएं।

खर्राटे लेना: थकान के बाद सोते समय खर्राटे लेना एक आम बात है लेकिन अगर आप को लग रहा है की आप सोते समय कुछ ज्यादा ही तेजी से और तेज आवाज में खर्राटे ले रही हैं तो ये कार्डियोवास्कुलर और वजन बढ़ने का भी लक्षण हो सकते हैं।

सांस में लेने में कठिनाई: कुछ महिलाओं को सांस लेने में अक्सर कुछ कठिनाई होती है; और इसका मतलब होता है की आपके हार्ट को पूर्ण रूप से ब्लड की सप्लाई नहीं हो रही होती है। अक्सर महिलाओं में इन परेशानियों से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

मेंसुरेशन में बदलाव: पीरियड्स में चेंज होना एक सामान्य बात है लेकिन अगर आप कुछ अलग नोटिस कर रही हैं; जैसे की फ्लो बढ़ना, दर्द ज्यादा होना, ब्लीडिंग ज्यादा होना, समय पर पीरियड्स का न आना आदि। ये सभी लक्षण एक खतरनाक बीमारी के संकेत हो सकते हैं। इस प्रकार के लक्षणों से ओवरी कैंसर, इन्फेक्शन व अन्य कई बड़ी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।

कमजोरी: शरीर के किसी भी हिस्से में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करना, चेहरे या हाथ-पैर में सुन्न जैसा महसूस करना यह सब ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण है। ऐसे किसी भी लक्षण के महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए न की इन्हें नार्मल लक्षण मानकर अपनी सेहत के साथ कोई भी समझौता नहीं करना चाहिए।

Astrology: कुंडली में बुध ग्रह के कमजोर होने पर इस तरह के मिलते हैं संकेत, जानिए मजबूत करने के उपाय

कुंडली में बुध कमजोर हैं व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 9 ग्रहों में बुध ग्रह को तटस्थ ग्रह माना गया है। कहने का अर्थ है अन्य ग्रहों के साथ मिलने पर उनके अनुरूप ही यह फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह गुरु, शुक्र और बलवान चंद्रमा के साथ युति बनाता है तो यह जातकों का शुभ फल प्रदान करते हैं। वहीं अगर बुध ग्रह की संगति मंगल, शनि, राहु, केतु और सूर्य के साथ हो तो यह अशुभ फल देते हैं। बुध ग्रह मिथुन और कन्या दो राशियों के स्वामी ग्रह हैं। कन्या इनकी उच्च राशि और मीन नीच की राशि मानी गई हैं। इसके अलावा ज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, गणित और संवाद के कारक ग्रह माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते हैं उन्हें व्यापार, शिक्षा और नौकरी में सफलता दिलाते हैं। वही अगर किसी की कुंडली में बुध कमजोर हैं व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। आइए जानते हैं बुध ग्रह के कमजोर होने के संकेत और इसे प्रबल बनाने के संकेत।

बुध ग्रह के कमजोर होने से कुछ संकेत

- अगर आपको लगे कि आप दिनों-दिन कर्ज के बोझ के तले दबते जा रहें तो यह आपकी कुंडली में बुध ग्रह के कमजोर होने के संकेत हैं।

- व्यक्ति के मान-सम्मान में कमी आने पर बुध ग्रह के कमजोर के लक्षण होते हैं।

- जब व्यक्ति को त्वचा संबंधी रोग पैदा होने लगे और मुख से तेज गायब हो तो समझिए आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है।

- अगर व्यक्ति की पढ़ने की क्षमता कमजोर होने लगे तो समझें आपकी की कुंडली में बुध कमजोर है।

- बोलने की क्षमता में किसी तरह का दोष होने पर व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह दोष माना जाता है।

- नौकरी या बिजनेस में ज्यादा सफलता न पाने को भी कुंडली में दोष माना जाता है।

बुध ग्रह को मजूबत बनाने के उपाय

- जातक की कुंडली में बुध ग्रह के कमजोर होने पर पन्ना रत्न पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह ध्यान रखें पन्ना रत्न पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

- बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए भगवान गणेश की उपासना विधि-विधान से करना चाहिए।

- अगर किसी की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है तो उसे रोजाना ओम बुधाय नम: का जाप एक सफल व्यापारी के लक्षण करना शुभ होता है।

- बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए बुधवार को मूंग की दाल का दान करें।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 9 ग्रहों में बुध ग्रह को तटस्थ ग्रह माना गया है। कहने का अर्थ है अन्य ग्रहों के साथ मिलने पर उनके अनुरूप ही यह फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह गुरु, शुक्र और बलवान चंद्रमा के साथ युति बनाता है तो यह जातकों का शुभ फल प्रदान करते हैं। वहीं अगर बुध ग्रह की संगति मंगल, शनि, राहु, केतु और सूर्य के साथ हो तो यह अशुभ फल देते हैं। बुध ग्रह मिथुन और कन्या दो राशियों के स्वामी ग्रह हैं। कन्या इनकी उच्च राशि और मीन नीच की राशि मानी गई हैं। इसके अलावा ज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, गणित और संवाद के कारक ग्रह माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते हैं उन्हें व्यापार, शिक्षा और नौकरी में सफलता दिलाते हैं। वही अगर किसी की कुंडली में बुध कमजोर हैं व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। आइए जानते हैं बुध ग्रह के कमजोर होने के संकेत और इसे प्रबल बनाने के संकेत।

बुध ग्रह के कमजोर होने से कुछ संकेत

- अगर आपको लगे कि आप दिनों-दिन कर्ज के बोझ के तले दबते जा रहें तो यह आपकी कुंडली में बुध ग्रह के कमजोर होने के संकेत हैं।

- व्यक्ति के मान-सम्मान में कमी आने पर बुध ग्रह के कमजोर के लक्षण होते हैं।

- जब व्यक्ति को त्वचा संबंधी रोग पैदा होने लगे और मुख से तेज गायब हो तो समझिए आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है।

- अगर व्यक्ति की पढ़ने की क्षमता कमजोर होने लगे तो समझें आपकी की कुंडली में बुध कमजोर है।

- बोलने की क्षमता में किसी तरह का दोष होने पर व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह दोष माना जाता है।

- नौकरी या बिजनेस में ज्यादा सफलता न पाने को भी कुंडली में दोष माना जाता है।

बुध ग्रह को मजूबत बनाने के उपाय

- जातक की कुंडली में बुध ग्रह के कमजोर होने पर पन्ना रत्न पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह ध्यान रखें पन्ना रत्न पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

- बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए भगवान गणेश की उपासना विधि-विधान से करना चाहिए।

- अगर किसी की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है तो उसे रोजाना ओम बुधाय नम: का जाप करना शुभ होता है।

Bad signs of planets : बगैर कुंडली देखे भी जान सकते हैं ग्रहों से जुड़े दोष, जानें अशुभ ग्रहों के लक्षण

ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी पर जन्म लेते ही इंसान नवग्रहों से जुड़ जाता है और उसकी कुंडली के 12 खानों में स्थित नवग्रह आजीवन उस पर अपना शुभ और अशुभ प्रभाव दिखाते हैं. नवग्रहों से जुड़ी अशुभता को पहचानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

Bad signs of planets : बगैर कुंडली देखे भी जान सकते हैं ग्रहों से जुड़े दोष, जानें अशुभ ग्रहों के लक्षण

ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुंडली के 12 खानों में स्थित नवग्रह उस पर आजीवन असर डालते हैं. ग्रहों की बदलती स्थिति के चलते उनके शुभ या अशुभ प्रभाव कभी भी किसी पर आ सकते हैं. कहते हैं कि बुरे दिन कभी भी किसी से पूछकर नहीं आते हैं, लेकिन किस ग्रह के कारण आपको तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं उसके बारे में आप जरूर पता लगा सकते हैं. उसे जानकार उस ग्रह से संबंधित उपाय कर सकते हैं. कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति पर ग्रहों की खराब दशा आती है तो अरबपति आदमी भी खाकपति हो जाता है. अच्छा खासा पहलवान व्यक्ति कमजोर हो जाता है. बरहाल किसी भी ग्रह विशेष से संबंधित खराब दशा को तमाम संकेतों से जान सकते हैं. आइए ग्रहों की अशुभता के लक्षण के बारे में जानते हैं.

सूर्य की अशुभता के लक्षण

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में सूर्य ग्रह के अशुभ होने पर व्यक्ति का अपने पिता के साथ झगड़ा होने लगता है और वह अपने ही पिता का विरोध करना शुरु कर देता है. सूर्य की अशुभता के चलते पिता को कष्ट होता है. व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास में कमी आती है, मानहानि, सत्तापक्ष से कष्ट, हृदय रोग, पित्त रोग, नेत्र पीड़ा, चर्मरोग, अस्थि रोग आदि समस्याएं होती हैं.

चंद्रमा की अशुभता के लक्षण

कुंडली में चंद्रमा के अशुभ या फिर कहें कमजोर होने पर व्यक्ति मानसिक से रूप से परेशान रहता है. उसे तमाम तरह की चिंताएं घेरे रहती हैं. व्यक्ति को निद्रा रोग, रक्त विकार, कफ की बीमारी, सर्दी-जुकाम, चिंता, श्वसन संबंधी दिक्कतें, मतिभ्रम आदि दिक्कत बनी रहती है. यदि आपकी मां की तबीयत हमेशा खराब रहे तो यह आपकी कुंडली में अशुभ चंद्रमा की निशानी है.

मंगल की अशुभता के लक्षण

किसी जातक की कुंडली में मंगल के अशुभ या कमजोर होने पर उसे अपने भाईयों से विरोध झेलना पड़ता है. उसे अचल सम्पत्ति, जमीन आदि से जुड़े विवाद को झेलना पड़ता है. अशुभ मंगल ग्रह के कारण संपत्ति को आग या चोर से भय बना रहता है. मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति अभिमान और क्रोध की अधिकता रहती है. अस्थि मज्जा की बीमारियां, शरीर में जलन, अल्सर, फोड़े फुन्सी आदि रोग होते हैं.

बुध की अशुभता के लक्षण

बुध के अशुभ होने पर व्यक्ति को वाणी दोष होता है. कुंडली में बुध की अशुभता कॅरिअर-कारोबार में मनचाही सफलता में व्यवधान लाती है. व्यापार में घाटा होने लगता है. व्यक्ति को चर्मरोग की शिकायत रहने लगती है और उसकी तर्क शक्ति क्षीण हो जाती है. अशुभ बुध पक्षाघात, दाद, खुजली, नपुंसकता, गूंगापन, गले में खराबी, आदि लेकर आता है.

बृहस्पति की अशुभता के लक्षण

बृहस्पति के अशुभ होने पर कन्या के विवाह में दिक्कतें आती हैं. उसके मान-सम्माम में कमी आती है. कमजोर एवं पीड़ित बृहस्पति के कारण सौभाग्य और सेहत प्रभावित होता है. व्यक्ति को पाचन तन्त्र में खराबी, एक सफल व्यापारी के लक्षण पीलिया, गुर्दा आदि से सम्बन्धित बीमारी होती है. उसे अपयश, कलंक, असफलता, वियोग, आदि झेलना पड़ता है.

शुक्र की अशुभता के लक्षण

शुक्र के अशुभ होने पर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में कष्ट होता है. उसे प्रेम संबंधों में असफलता का सामना करना पड़ता है या फिर प्रेम संबंधों में तमाम तरह की बाधाएं आती हैं. व्यक्ति को जननेन्द्रियों से जुड़े रोग होते हैं. शुक्र की अशुभता के चलते व्यक्ति का शरीर कान्ति हीन हो जाता है. शुक्र के दोष के कारण व्यक्ति व्यभिचारी होता है. इसी प्रकार स्त्रियां परपुरुष संग संबंध बनाती हैं.

शनि की अशुभता के लक्षण

कुंडली में शनि संबंधी दोष होने पर व्यक्ति को पेट में गैस से संबंधित समस्याएं होने लगती हैं. उसे हर समय पेट संबंधी कोई न कोई दिक्कत बनी रहती है. शनिदोष के चलते जातक को तमाम तरह के शारीरिक कष्ट, पारिवारिक कलह, सम्पत्ति नाश, रोग व्याधि, अपमान, राजकीय कोप, आदि का एक सफल व्यापारी के लक्षण सामना करना पड़ता है. व्यक्ति में आलस्य आता है और वह गलत कार्यों में लिप्त होने लगता है.

राहु की अशुभता के लक्षण

मान्यता है कि जब कुंडली में राहु अशुभ फल देने लगता है तो व्यक्ति को कार्यों में असफलता मिलने लगती है. उसका मन न तो किसी कार्य में और न ही पूजा-पाठ में लगता है. उसे तमाम तरह की चिंताएं और लोगों से धोखा खाने की चिंता घेरने लगती हैं. व्यक्ति को सन्तानहीनता, राजदण्ड, कारावास, शत्रु, चोर, चोट-चपेट आदि का भय बना रहता है.

केतु की अशुभता के लक्षण

केतु के अशुभ होने पर व्यक्ति शारीरिक क्षति होती है. व्यक्ति की लोगों से अचानक झगड़े, दुश्मनी आदि होने लगती है. केतु के दोष के कारण व्यक्ति को अपने नौकरों से ही कष्ट होने और शत्रुओं से खतरा बना रहता है. व्यक्ति गलत कार्यों के प्रति लिप्त होने लगता है. उसे जननेंद्रिय रोग घेरने लगते हैं.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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