Economy रुपया 10 पैसे की तेजी के साथ 82.28 प्रति डॉलर पर

मुंबई: विदेशी बाजारों में डॉलर के कमजोर होने के साथ अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 10 पैसे बढ़कर 82.28 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार सूत्रों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बाजार से निकासी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इससे रुपये की बढ़त पर कुछ अंकुश लग गया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 82.30 के स्तर पर खुला और कारोबार के अंत में यह 10 पैसे की तेजी के साथ 82.28 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये ने 82.08 के उच्चस्तर और 82.33 के निचले स्तर को छुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 82.38 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था। बाजार सूत्रों ने कहा कि ब्याज घरेलू मुद्रा क्या है? दर में वृद्धि की गति के बारे में अतिरिक्त संकेतों के लिए निवेशकों को अगले सप्ताह केन्द्रीय बैंक की बैठकों के नतीजों के सामने आने का इंतजार है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विदेशी मुद्रा एवं सर्राफा विश्लेषक गौरांग सोमैया ने कहा, ‘‘निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से अब एफओएमसी के नीतिगत बयान पर होगी। केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है और कम आक्रामक रुख अपनाये रह सकता है।” इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर की घरेलू मुद्रा क्या है? मजबूती घरेलू मुद्रा क्या है? को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत घटकर 104.71 रह गया।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.22 प्रतिशत बढ़कर 77.08 डॉलर प्रति बैरल हो गया। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 389.01 अंक टूटकर 62,181.67 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने बृहस्पतिवार को 1,131.67 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। (एजेंसी)

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 81.71 प्रति डॉलर पर अपरिवर्तित घरेलू मुद्रा क्या है? बंद

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 81.69 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 81.44 के उच्चस्तर और 81.71 के निचले स्तर तक गया। अंत में रुपया मात्र एक पैसे की गिरावट के साथ 81.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया बृहस्पतिवार 23 पैसे की बढ़त के साथ 81.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

बीएनपी पारिबा बाई शेयरखान में अनुसंधान विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि डॉलर की विनियम दर में गिरावट के बीच घरेलू शेयर बाजार में मजबूती से रुपया चढ़ा। विदेशी निवेशकों की लिवाली से भी घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।

रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक, श्रीराम अय्यर ने कहा, ‘‘आयातकों की डॉलर की मांग के बीच शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोर बंद हुआ। सप्ताह के दौरान, कमजोर डॉलर इंडेक्स के कारण आयातकों की मासांत डॉलर मांग से नुकसान की भरपाई होने से रुपये में मामूली गिरावट आई।’’

अय्यर ने कहा कि घरेलू स्तर पर, भारत की सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े अगले सप्ताह आने वाले हैं और घरेलू बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा निर्धारक साबित होंगे।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर की कमजोरी या मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 105.96 पर आ गया।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.70 प्रतिशत चढ़कर 86.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक 20.96 अंक की तेजी के साथ 62,293.64 अंक पर बंद हुआ।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 369.08 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर ख़रीदे।

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 115 अंक चढ़ा; निफ्टी 18,640 अंक के पार

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। वैश्विक बाजारों में मजबूती और वाहन, धातु तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में लिवाली के बीच शेयर बाजारों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में बढ़त रही और सेंसेक्स 115 अंक चढ़ गया। कारोबारियों ने कहा कि अन्य मुद्राओं की तुलना में रूपये में मजबूती से भी घरेलू बाजार में तेजी आई।

इस दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक 115.09 अंक या 0.18 फीसदी की तेजी के साथ 62,685.77 अंक पर पहुंच गया। व्यापक एनएसई निफ्टी 33.25 अंक या 0.18 फीसदी बढ़कर 18,642.60 पर था। सेंसेक्स में इंडसइंड बैंक (1.10 फीसदी की बढ़त), एचयूएल, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एसबीआई, आईटीसी, नेस्ले इंडिया और मारुति बढ़ने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल थे।

दूसरी ओर एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एक्सिस बैंक के शेयरों में गिरावट घरेलू मुद्रा क्या है? हुई। पिछले कारोबारी सत्र में, बृहस्पतिवार को तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 160 अंक की बढ़त के साथ 62,570.68 अंक पर बंद हुआ था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 48.85 अंक की तेजी के साथ 18,609.35 अंक पर बंद हुआ था।

अन्य एशियाई बाजारों में सियोल, तोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजारों में तेजी थी। अमेरिकी बाजार भी बृहस्पतिवार को बढ़त के साथ बंद हुए। अंतरराष्ट्रीय तेल सूचकांक ब्रेंट क्रूड 0.85 प्रतिशत बढ़कर 76.80 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था। घरेलू मुद्रा क्या है? शेयर बाजार के अस्थाई आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 1,131.67 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे बढ़कर 82.19 पर

घरेलू शेयर बाजारों में तेजी और अमेरिकी मुद्रा में कमजोरी की वजह से रुपया शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे बढ़कर 82.19 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से रुपया प्रभावित हुआ, और उसकी बढ़त सीमित हुई।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 82.30 पर खुला और कुछ बढ़त के साथ 82.19 पर आ गया जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 19 पैसे की बढ़त को दर्शाता है। रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नौ पैसे मजबूत होकर 82.38 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.23 फीसदी गिरकर 104.53 पर आ गया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.89 फीसदी की बढ़त के साथ 76.83 डॉलर प्रति बैरल था।

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Crypto Currency News : रडार पर 3,300 से अधिक क्रिप्टो अकाउंट, अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने की आशंका…

Crypto Currency News: पिछले 8 महीनों में 3300 से ज्यादा crypto currency खातों की निगरानी के बाद भारत की फाइनेंस इंटेलिजेंस यूनिट (Finance Intelligence Unit of India) ने इनके अवैध गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी हासिल की है. ऐसे संकेत हैं कि इन क्रिप्टो खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है.

इसमें सामाजिक तनाव पैदा करने के लिए फंडिंग आदि भी शामिल है. फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने भारत और विदेशों में मौजूद क्रिप्टो एक्सचेंजों को यह जानकारी दी है. फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने क्रिप्टो एक्सचेंज को इन संदिग्ध क्रिप्टो खातों को बंद करने के लिए कहा है. भारत एग्मोंट समूह का सदस्य है, जो दुनिया के 166 देशों के आर्थिक खुफिया मॉडल का वैश्विक समूह है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में कहा, ‘इस साल अप्रैल से नवंबर तक 3300 क्रिप्टो खातों की जांच की गई है, जो विभिन्न अवैध गतिविधियों से जुड़े हुए हैं.

इन क्रिप्टो खातों का रिकॉर्ड ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई को सौंप दिया गया है. सुरक्षा एजेंसियों ने इन क्रिप्टो खातों को बंद करने का आदेश दिया है और कहा है कि भारत में सक्रिय क्रिप्टो एक्सचेंजों से संपर्क कर उन्हें क्रिप्टो खातों पर नजर रखने के लिए भी कहा जा रहा है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इन सभी खातों से किए जा रहे लेन-देन मादक पदार्थों की तस्करी, नकदी शोधन, अश्लील साहित्य और वन्यजीव तस्करी जैसी गतिविधियों के लिए किए जा रहे हैं. डिजिटल संपत्ति की निगरानी करने वाली 3 क्रिप्टो फर्म भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं. उनकी मदद से इनमें से कई खातों की पहचान की गई है.

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने साल 2019 से 2021 के बीच क्रिप्टो करेंसी की मदद से करीब 28,000 करोड़ रुपए के ड्रग ट्रांजेक्शन का खुलासा किया था. अधिकारी ने बताया कि फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने क्रिप्टो करेंसी डिपॉजिट के मामले में कई ऐसे ट्रांजैक्शन का भी पता लगाया है, जिनका इस्तेमाल समाज में तनाव फैलाने और विरोध आदि के लिए किया जा रहा है.

बीते दिनों क्रिप्टो करेंसी की मदद से सामाजिक वैमनस्य फैलाने की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय है. इनमें से ज्यादातर खातों से लेन-देन डार्क वेब पर किया जाता है. जांच एजेंसियों द्वारा तकनीक के इस्तेमाल और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण उन्हें इस तरह के लेनदेन को रोकने में काफी मदद मिल रही है.

रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा-सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक हो सकता है भारत

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने वैश्विक आर्थिक आउटलुक (Global Economic Outlook) के दिसंबर अंक में कहा कि अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति को देखते हुए भारत की जीडीपी वृद्धि चालू वित्त वर्ष में 7 फीसदी रह सकती है।

उभरते घरेलू मुद्रा क्या है? बाजारों में भारत की सबसे तेज विकास दर दर्ज करने की उम्मीद

भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में उम्मीद से अधिक बढ़ी है। वहीं अर्थव्यवस्था में खपत और निवेश से बड़े पैमाने पर वृद्धि के कारण 6.3 प्रतिशत साल-दर-साल की बढ़ोतरी हो रही है। फिच ने बताया कि ये अनुमान उसके सितंबर ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक (जीईओ) के 5.5 के पूर्वानुमान से भी ऊपर है।

इस साल फिच 20 कवरेज में भारत के उभरते बाजारों में सबसे तेज विकास दर दर्ज करने की उम्मीद है। भारत को अपनी अर्थव्यवस्था की घरेलू रूप से केंद्रित प्रकृति को देखते हुए वैश्विक आर्थिक झटकों से ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है, जिसमें खपत और निवेश देश के सकल घरेलू उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा है। विनिर्माण पीएमआई का रोजगार उप-सूचकांक भी अक्टूबर में लगभग तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जबकि सेवा क्षेत्र में भी समकक्ष विस्तार में रहा है।

विश्व बैंक ने भी जीडीपी के पूर्वानुमान को संशोधित कर किया 6.9 फीसदी

भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के संकेत को इस बात से भी समझा जा सकता है कि विश्व बैंक ने अपने नवीनतम भारत विकास अपडेट में ‘नेविगेटिंग द स्टॉर्म’ शीर्षक से चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो सितंबर के अंत में वर्ष के घरेलू मुद्रा क्या है? लिए अनुमानित 6.5 प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री ध्रुव शर्मा ने कहा कि इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि दो साल की अवधि के अंत में भारत उसी स्थिति में होगा जैसा हमने पहले भविष्यवाणी की थी।

उन्होंने आगे कहा कि भारत 10 साल पहले की तुलना में अब अधिक मजबूत है। पिछले 10 सालों में उठाए गए सभी कदम भारत को वर्तमान वैश्विक विपरीत दिशा में संचालन करने में मदद कर रहे हैं। विश्व बैंक ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल अपने उभरते बाजार समकक्षों की तुलना में वैश्विक विपरीत परिस्थितियों को संभालने के लिए बेहतर स्थिति में है, बल्कि यह पिछले संकटों की तुलना में तेजी से कोविड-19 महामारी के झटकों से भी उबरी है।

अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के प्रयास जारी

वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था भारी संकटों का सामना कर रही है। कोविड महामारी,रूस-यूक्रेन युद्ध,वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अवरोध और ब्याज दरों में वृद्धि आदि ने दुनियाभर की आर्थिक प्रक्रियाओं को प्रभावित किया है। इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में मात्र 3.2 प्रतिशत की घरेलू मुद्रा क्या है? वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष के 6 प्रतिशत से कम है और आने वाले वर्ष में इसके 2.7 प्रतिशत तक पहुंचने के आसार हैं।

लेकिन उसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस समय में न केवल स्वयं को इस से प्रभावित होने से बचाया है,बल्कि अपनी आर्थिक प्रक्रियाओं में भी बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के आँकड़े एकतरफ जब लगातार सिकुड़ रहें हैं वहीं ऐसे समय में भी भारत ने अपनी आर्थिक वृद्धि दर को संतुलित बनाए रखा है।

मौसमी रूप से समायोजित घरेलू मुद्रा क्या है? एसएंडपी ग्लोबल इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) अक्टूबर के 55.3 से बढ़कर नवंबर में 55.7 हो गया जो तीन घरेलू मुद्रा क्या है? महीनों के दौरान परिचालन परिस्थितियों में मजबूत सुधार दर्शाता है वही नवंबर के पीएमआई आंकड़ों के साथ ही लगातार 17वें महीने में समग्र परिचालन स्थितियों में सुधार देखने को मिला है। इसके अतिरिक्त भारत ने अपने आयात-निर्यात संतुलन को भी बनाए रखा है।

ग्रोथ रेट को लेकर तमाम एजेंसियों का क्या कहना है?

इंडियन इकोनॉमी को लेकर अलग-अलग एजेंसियों की बात करें तो नवंबर के अंत में S&P Global Ratings ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को घटाकर सात फीसदी कर दिया था। लेकिन अब उसका अनुमान है कि वर्ष 2022-23 में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी की गति से बढ़ेगी। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान 6.8 फीसदी है। S&P का अनुमान 7.3 फीसदी, मूडीज और मार्गन स्टैनली का अनुमान घरेलू मुद्रा क्या है? 7 फीसदी, गोल्डमैन सैक्श का 7.1 फीसदी, सिटी बैंक का 6.7 फीसदी और रिजर्व बैंक का 7 फीसदी का अनुमान है।

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